
भारत के संसद ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए “Promotion and Regulation of Online Gaming Bill, 2025” पास कर दिया है। इस नए कानून के तहत ऐसी सभी ऑनलाइन गेमिंग सेवाओं पर पाबंदी लगेगी जिनमें पैसे लगाने पर जीतने या हारने की संभावना रहती है। इसका उद्देश्य युवाओं और समाज को आर्थिक और मानसिक रूप से होने वाले नुकसान से बचाना बताया गया है। सरकार ने गेमिंग और उससे जुड़ी वित्तीय लेनदेन पर कटौती का निर्णय लिया, क्योंकि इसके चलते होने वाले घातक प्रभावों को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विधेयक दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—से पारित हो चुका है और अब सिर्फ राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है, जिसे औपचारिकता ही माना जाता है। इसके लागू होते ही बड़ी गेमिंग कंपनियों जैसे Dream11 (Dream Sports), Mobile Premier League, Zupee, Games24X7 जैसे प्लेटफॉर्म खतरे में पड़ गए हैं। उद्योग जगत में अनुमान है कि भारत की इस उभरती हुई फ़ैंटेसी गेमिंग इंडस्ट्री की कीमत 2029 तक 3.6 अरब डॉलर होगी, लेकिन अब इस भविष्य की अटकलें अवरुद्ध हो गई हैं।
सरकार ने इस कदम का कारण स्पष्ट किया है—इन गेम्स से जुड़ी लत, आर्थिक धोखाधड़ी, धोखाधड़ीपूर्ण विज्ञापन, और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही थीं। इतना ही नहीं, इससे आर्थिक अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद जैसी गंभीर गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का जोखिम भी होता है। यह निर्णय केवल गेमिंग प्लेटफॉर्म ऑपरेटरों को नहीं बल्कि उन सेलिब्रिटीज़ और इन्फ्लुएंसर्स को भी प्रभावित करता है जो इन ऐप्स का प्रचार करते हैं, साथ ही उन वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बनाता है जो इन लेनदेन को सुविधा देते हैं। अब इस प्रकार के कामों पर भारी जुर्माना और जेल की व्यवस्था भी कानून में शामिल है।
तकनीकी समुदाय और फैंटेसी गेमिंग ऑपरेटरों के लिए यह झटका साफ था। कई स्टार्टअप जैसे Dream Sports (Dream11), MPL, Probo, Gameskraft और Zupee ने इस बिल के पारित होते ही रियल-मनी गेम्स को बंद करना शुरू कर दिया। Dream Sports ने कर्मचारियों को बताया कि उनका प्रमुख प्लेटफॉर्म Dream11 जल्द ही नॉन-पेड फॉर्मैट में बदल जाएगा। MPL ने स्पष्ट घोषणा कर दी कि वो सभी पैसे आधारित गेम्स बंद कर देगा और यूज़र्स को उनके जमा पैसे वापस कर दिए जाएंगे। Zupee ने बताया कि वो ‘पेड गेम्स’ बंद कर रहा है, लेकिन Ludo, Snakes & Ladders जैसे मुफ्त गेम्स जारी रहेंगे।
इन कंपनियों ने उद्योग की अस्थिरता के बीच नई मार्ग खोजने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। कुछ गेमिंग लीडर्स अब विज्ञापन आधारित मॉडल पर विचार कर रहे हैं, वहीं कुछ विदेशी बाजारों में अपनी सेवाओं का विस्तार करने की रणनीति बना रहे हैं, जहां रियल-मनी गेमिंग वैध है। हालांकि यह कदम लाभदायक नहीं होगा जैसा कि रियल-मनी गेमिंग था। कर्मचारी अपनी नौकरियों को लेकर चिंतित हो उठे हैं और भविष्य अज्ञात हो गया है।
Gaming उद्योग के प्रतिनिधि समूहों ने गृह मंत्री को लिखे पत्रों में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के संभावित कर राजस्व नुकसान की बात कही है और इंडस्ट्री को समर्थन देने की अपील की है। वे यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि इस तरह की पूर्ण पाबंदी से लोग अनियंत्रित विदेशी ग्रे-मार्केट प्लेटफॉर्मों की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ेंगे।
डिजिटल मंत्रालय के मुताबिक इसमें एक राष्ट्रीय गेमिंग अथॉरिटी की स्थापना की भी योजना शामिल है, जो ई-स्पोर्ट्स और सामाजिक गेमिंग को सुरक्षित और संरचित तरीके से बढ़ावा देंगी, जबकि पैसा रखने वाले खेलों पर रोक होगी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने इसे ड्रग्स की तुलना में अधिक दुर्भावनापूर्ण बताया और कहा कि यह जन स्वास्थ्य के हित में फैसला है।
दंड संबंधी प्रावधानों में उल्लंघन पर तीन साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना शामिल है। यदि अपराध दोहराया जाता है, तो यह दंड और भी बढ़कर पांच साल जेल और दो करोड़ रुपये तक हो सकता है। इसके अलावा प्रचार या वित्तीय भागीदारी में भी सख्त पाबंदियाँ लागू होंगी।
इस फैसले ने वित्तीय, तकनीकी, सामाजिक और मनोरंजन के कई क्षेत्रों में व्यापक प्रभाव छोड़ा है। भारतीय स्टॉक मार्केट में गेमिंग संबंधी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट रही—Nazara Tech के शेयरों में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, वहीं Delta Corp के शेयरों में दो दिनों में कुल मिलाकर लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट आई।
इसके तुरंत बाद उद्योग के प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के विकल्पों पर वार्ता शुरू कर दी है। उनका तर्क है कि गेम्स ऑफ स्किल और गेम्स ऑफ चांस में अंतर होना चाहिए था, लेकिन यह नया कानून दोनों को एक समान रूप से प्रतिबंधित कर रहा है।
उद्योग आंकड़ों के मुताबिक यह सेक्टर लगभग 2 ट्रिलियन रुपये (करीब 23 अरब डॉलर) का है, जिसकी वार्षिक आय 310 अरब रुपये से अधिक है और यह करों के माध्यम से लगभग 200 अरब रुपये सरकार को दे रहा है। इस क्षेत्र में लाखों लोग कार्यरत हैं और कई विदेशी निवेशक इसमें रुचि रखते हैं। अध्ययनों के आधार पर 2028 तक इस सेक्टर के दोगुने हो जाने की संभावना जताई गई थी।
साथ ही, इसके लागू होने से मनोरंजन उद्योग—विशेषकर क्रिकेटर्स عبر-के द्वारा प्रमोटेड—किफायती मंचों और मार्केटिंग को भी झटका लगा है, जो खेलों के विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप पर निर्भर था।
इस नए कानून ने यह स्पष्टीकरण भी दे दिया कि सरकार ई-स्पोर्ट्स पथ अपनाना चाहती है, जहां खिलाड़ी अपनी कौशल के दम पर प्रतिस्पर्धा करें, लेकिन आर्थिक जोखिमों से बचें। सामाजिक और शैक्षिक गेमिंग को भी बढ़ावा मिलेगा—जो समग्र रूप से एक संरचित, सुरक्षित और न्यायप्रिय डिजिटल गेमिंग पारिस्थितिकी का निर्माण करेगा।
बहरहाल, यह बदलाव उद्योग के लिए अब तक का सबसे बड़ा नियामक झटका है। कई युवा पेशेवरों और डेवलपरों के रोज़गार संकट में हैं। प्रौद्योगिकी निवेशकों के लिए यह अस्थिरता का संकेत है। यूज़र्स—खासकर वो जो कम पैसे में खेलते थे—उनके लिए नये विकल्प अपनाने पड़ सकते हैं या सुझाव मिलता है कि उन्हें अन्य मनोरंजन स्रोतों की ओर रुख करना पड़ सकता है।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कदम सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा में सुधार लाने के उद्देश्य से लिया गया है। साथ ही, यह संकेत दे रही है कि डिजिटल गेमिंग में भी संरक्षा और नैतिकता का संतुलन लाना अब समय की मांग है।
इस निर्णय के असर लंबे समय तक रहेंगे—जबकी कुछ लोग इसे डिजिटल सुरक्षा और युवा संरक्षण की दिशा में तार्किक निर्णय बताएंगे, वहीं उद्योग यह कदम विनाशकारी तथा असमय माना जाएगा। समय बताएगा कि यह कानून देश की डिजिटल गेमिंग संस्कृति को नए रूप में आकार देगा, या इसे पीछे ले जाएगा।
