भारतीय शेयर बाज़ार पर विदेशी पूंजी का पलायन

भारतीय शेयर बाज़ार, जिसे पिछले कुछ वर्षों में उभरते बाज़ारों (Emerging Markets – EM) का पसंदीदा गंतव्य माना जा रहा था, अब विदेशी निवेशकों की प्राथमिकता सूची से तेजी से बाहर होता दिख रहा है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, Dalal Street वर्तमान में वैश्विक EM निवेशकों के पोर्टफोलियो में सबसे कम वज़न (Largest Underweight) वाला बाज़ार बन गया है।


आंकड़ों के अनुसार, 2025 के शुरुआती आठ महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाज़ार से लगभग ₹1.2 लाख करोड़ (लगभग $14.5 अरब) की पूँजी निकाली है।
यह निकासी मुख्यतः आईटी, बैंकिंग और कंज्यूमर गुड्स जैसे प्रमुख सेक्टरों से हुई है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है।


2025 की पहली दो तिमाहियों में भारत की कई बड़ी कंपनियों ने अपेक्षाओं से कम मुनाफ़ा दर्ज किया। बैंकिंग और आईटी सेक्टर, जिन्हें लंबे समय तक ग्रोथ इंजन माना गया था, अब दबाव में हैं।

अमेरिकी फेडरल रिज़र्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की नीतियों के कारण डॉलर मज़बूत हुआ है। परिणामस्वरूप, उभरते बाज़ारों से पूँजी विकसित बाज़ारों की ओर खिसक रही है।

हाल ही में चीन ने अपने शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई प्रोत्साहन (incentives) घोषित किए हैं। वहीं, दक्षिण कोरिया की तकनीकी और सेमीकंडक्टर कंपनियों ने मजबूत नतीजे दिए हैं। इससे FIIs का झुकाव भारत से हटकर इन बाज़ारों की ओर हो रहा है।

लगातार पूँजी निकासी और व्यापार घाटे में बढ़ोतरी ने रुपये को डॉलर के मुकाबले कमजोर कर दिया है। यह स्थिति विदेशी निवेशकों के लिए रिटर्न घटाने का काम कर रही है।


  • निफ्टी 50 में पिछले तीन महीनों में लगभग 8% गिरावट दर्ज की गई है।
  • मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर असर और भी गहरा रहा, जिससे खुदरा निवेशक भी सतर्क हो गए हैं।
  • बैंकिंग और आईटी इंडेक्स पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ के एक विश्लेषक के अनुसार:

“यह निकासी भारत की बुनियादी मजबूती पर सवाल नहीं है, बल्कि वैश्विक निवेश रणनीति का हिस्सा है। निवेशक फिलहाल बेहतर रिटर्न और कम वैल्यूएशन वाले बाज़ारों की तलाश में हैं।”

वहीं, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भारत के लिए एक संकेत (wake-up call) है कि उसे कॉर्पोरेट गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार और दीर्घकालिक नीति स्थिरता पर और ध्यान देना होगा।


भारत की अर्थव्यवस्था अब भी 6.5% से अधिक जीडीपी ग्रोथ दर बनाए हुए है, जो अधिकांश उभरते बाज़ारों से बेहतर है।
इसके अलावा, सरकार का मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, और हरित ऊर्जा निवेश पर ज़ोर आने वाले वर्षों में निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।

हालांकि, फिलहाल का रुझान यह दर्शाता है कि Dalal Street विदेशी निवेशकों की प्राथमिकता में सबसे नीचे पहुंच चुका है।


विदेशी पूँजी का पलायन भारतीय बाज़ार के लिए एक झटका है, लेकिन यह स्थायी प्रवृत्ति नहीं भी हो सकती। भारत को अपनी नीतिगत पारदर्शिता, निवेश माहौल और सेक्टोरल प्रदर्शन को और मज़बूत करना होगा। तभी Dalal Street दोबारा वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन पाएगा।