ड्रेक पासेज का भूकंप: वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भविष्य के खतरे

दक्षिणी महासागर के गहरे और ठंडे पानी में स्थित ड्रेक पासेज में शुक्रवार को एक शक्तिशाली भूकंप आया जिसने पूरे वैज्ञानिक जगत और तटीय क्षेत्रों को हिला कर रख दिया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार यह भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.5 की तीव्रता का था। प्रारंभिक झटकों के तुरंत बाद चिली और अर्जेंटीना के दक्षिणी तटों पर त्सुनामी अलर्ट जारी कर दिया गया, हालाँकि बाद में अलर्ट को सीमित कर दिया गया।

भूकंप का केंद्र समुद्र के भीतर लगभग 25 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार इतनी गहराई में आने वाले भूकंप आमतौर पर अत्यधिक ऊर्जा छोड़ते हैं और इनके परिणामस्वरूप तटीय इलाकों में समुद्री लहरों की ऊँचाई असामान्य रूप से बढ़ सकती है। दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित ड्रेक पासेज एक संवेदनशील क्षेत्र है जो प्रशांत और अटलांटिक महासागर को जोड़ता है। यहाँ टेक्टोनिक प्लेटों की लगातार हलचल होती रहती है और इसी कारण यह इलाका भूकंपों और समुद्री उथल-पुथल के लिए जाना जाता है।

भूकंप आने के तुरंत बाद चिली और अर्जेंटीना की सरकारों ने अपने आपदा प्रबंधन केंद्र सक्रिय कर दिए। चिली के राष्ट्रीय आपदा कार्यालय (ONEMI) ने तटीय इलाकों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की और कुछ स्थानों पर अस्थायी निकासी की प्रक्रिया भी शुरू की गई। अर्जेंटीना के पटागोनिया क्षेत्र में भी लोगों को समुद्र से दूर रहने की सलाह दी गई। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार अभी तक किसी बड़े नुकसान या जान-माल की हानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन तटीय इलाकों में भय का माहौल बना हुआ है।

ड्रेक पासेज भूगोल और भूविज्ञान की दृष्टि से बहुत ही महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है। यह अंटार्कटिका को दक्षिण अमेरिका से अलग करता है और विश्व के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यहाँ की समुद्री धाराएँ बेहद तेज़ और ठंडी होती हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि यहाँ होने वाले भूकंप वैश्विक जलवायु और समुद्री प्रवाह पर भी असर डाल सकते हैं। क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में पानी की हलचल समुद्री धाराओं के संतुलन को बिगाड़ सकती है और यह दीर्घकाल में जलवायु परिवर्तन को प्रभावित कर सकती है।

भूकंप के बाद अंतर्राष्ट्रीय त्सुनामी निगरानी केंद्र ने पूरे अटलांटिक और प्रशांत के दक्षिणी हिस्से में नज़र रखना शुरू कर दिया। हालांकि कुछ घंटों बाद स्पष्ट हो गया कि समुद्री लहरों की ऊँचाई सामान्य से ज़्यादा नहीं बढ़ी है और बड़े पैमाने पर त्सुनामी का खतरा टल गया है। फिर भी वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे झटके हमें यह याद दिलाते हैं कि पृथ्वी का यह क्षेत्र कितना अस्थिर है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि भूकंप का झटका बहुत तेज़ था और कुछ सेकंड तक घरों और इमारतों की खिड़कियाँ और दरवाज़े जोर से हिलते रहे। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए। अर्जेंटीना के उशुआइया शहर के एक निवासी ने लिखा कि उसने अपने जीवन में इतना शक्तिशाली झटका पहली बार महसूस किया। वहीं, चिली के पुंटा एरेनास क्षेत्र में लोग घरों से बाहर निकल आए और कुछ देर तक खुले मैदानों में डरे-सहमे खड़े रहे।

भूवैज्ञानिकों ने बताया कि यह भूकंप स्कोटिया प्लेट और दक्षिण अमेरिकी प्लेट के बीच टकराव के कारण आया। यह क्षेत्र प्लेट टेक्टोनिक्स की दृष्टि से बहुत सक्रिय है। पिछले 50 वर्षों में यहाँ कई बड़े भूकंप आ चुके हैं, लेकिन 7.5 तीव्रता का झटका अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है। वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में आफ्टरशॉक्स यानी छोटे झटके महसूस हो सकते हैं। इसलिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।

इस भूकंप ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़े सवालों को भी फिर से चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र में आने वाली इस तरह की हलचलें अंटार्कटिक क्षेत्र की बर्फ की परतों को भी प्रभावित कर सकती हैं। यदि समुद्र का संतुलन बिगड़ता है, तो यह ग्लेशियरों के पिघलने की गति को तेज कर सकता है। इस कारण वैश्विक समुद्र तल में बढ़ोतरी और तटीय शहरों के लिए खतरा और गंभीर हो सकता है।

साथ ही, समुद्री जीवन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में समुद्र के भीतर हलचल से मछलियों और अन्य समुद्री जीवों के आवास में अस्थायी बदलाव हो सकता है। ड्रेक पासेज समुद्री जैव विविधता के लिए मशहूर है और यहां के पारिस्थितिक तंत्र पर निगाह रखना ज़रूरी होगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस भूकंप ने ध्यान खींचा है। संयुक्त राष्ट्र आपदा प्रबंधन इकाई ने प्रभावित देशों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। जापान और इंडोनेशिया जैसे भूकंप प्रभावित देशों ने अपने अनुभव साझा करने और तकनीकी मदद देने की पेशकश की है। भारतीय वैज्ञानिक भी इस पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में भी प्लेट टेक्टोनिक्स सक्रिय रहते हैं और यहाँ से सबक लेना ज़रूरी है।

स्थानीय प्रशासन और सरकारों की प्रतिक्रिया को देखते हुए कहा जा सकता है कि अब दक्षिण अमेरिकी देश भूकंप और त्सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पहले से कहीं ज्यादा तैयार हैं। 2010 में आए विनाशकारी चिली भूकंप के बाद से इन देशों ने अपनी आपदा प्रबंधन नीतियों को मजबूत किया है। इसी कारण इस बार त्वरित अलर्ट और निकासी संभव हो पाई।

हालांकि, आम जनता के बीच डर का माहौल अभी भी बरकरार है। लोग चिंतित हैं कि यदि भविष्य में इससे भी शक्तिशाली भूकंप आया तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि भूकंप की सटीक भविष्यवाणी करना संभव नहीं है, लेकिन तैयारी और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

ड्रेक पासेज का यह भूकंप न केवल दक्षिण अमेरिका और अंटार्कटिका क्षेत्र के लिए चेतावनी है बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी एक सबक है कि हमारी पृथ्वी निरंतर गतिशील है। समुद्र और ज़मीन की गहराई में चल रही हलचलें हमारे जीवन पर गहरा असर डाल सकती हैं। यह हमें याद दिलाता है कि तकनीक और विज्ञान के बावजूद इंसान अभी भी प्रकृति के सामने सीमित है और हमें उसके साथ संतुलन बनाकर जीना होगा।

इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैज्ञानिक अनुसंधान बेहद ज़रूरी हैं। साथ ही, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को गंभीरता से लेना होगा क्योंकि प्राकृतिक असंतुलन और मानव गतिविधियों का असर मिलकर भविष्य को और अनिश्चित बना सकता है।