
बेंगलुरु: तेज़ रफ़्तार शहर की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर एक महिला ऑटो ड्राइवर ने अपनी अलग पहचान बना ली है। उनका नाम है सफ़ुरा। हाल ही में उनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई है, जिसने लाखों लोगों को न केवल प्रभावित किया है बल्कि समाज में जमे पुराने सोच और धारणाओं को भी चुनौती दी है।
जुनून जिसने बना दी पहचान
सफ़ुरा को बचपन से ही ड्राइविंग का शौक था। गाड़ियों की आवाज़, स्टीयरिंग पर पकड़ और सड़क पर निकलने की आज़ादी—यह सब उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था। लेकिन समाज और परिवार में अक्सर यह सवाल उठता था कि “ड्राइविंग तो मर्दों का काम है, महिलाएँ कैसे ऑटो चला सकती हैं?”
सफ़ुरा ने इन सवालों का जवाब अपने काम से दिया। उन्होंने न सिर्फ़ ऑटो रिक्शा चलाना सीखा बल्कि इसे अपने रोज़गार का साधन भी बनाया। आज वे बेंगलुरु की सड़कों पर आत्मविश्वास से ऑटो चलाती हैं और यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफ़र कराती हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल
हाल ही में किसी यात्री ने सफ़ुरा की तस्वीर और उनकी कहानी सोशल मीडिया पर साझा की। देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई। लोग उनकी मेहनत, साहस और जुनून की तारीफ़ करने लगे। कई लोगों ने लिखा कि सफ़ुरा जैसी महिलाओं से समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए।
स्टीरियोटाइप तोड़ने का साहस
भारत में अब भी ऑटो ड्राइविंग पेशे में महिलाओं की संख्या बहुत कम है। लेकिन सफ़ुरा ने यह साबित किया है कि किसी भी पेशे में महिलाओं के लिए कोई बाधा नहीं है। उनका मानना है कि “काम को लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि मेहनत और लगन से आंका जाना चाहिए।”
यात्रियों का अनुभव
कई यात्री सफ़ुरा के साथ सफ़र करके बताते हैं कि वे न केवल एक बेहतरीन ड्राइवर हैं, बल्कि बेहद मददगार और विनम्र भी हैं। खासकर महिला यात्री खुद को उनके साथ अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं।
समाज के लिए संदेश
सफ़ुरा की कहानी इस बात की मिसाल है कि अगर जुनून और मेहनत हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उन्होंने यह दिखा दिया कि महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर सकती हैं।
आज सफ़ुरा सिर्फ़ एक ऑटो ड्राइवर नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं जो अपने सपनों को जीना चाहती हैं और समाज की बेड़ियों को तोड़ने का साहस रखती हैं।
